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Dost Ki Talaash......
एक दीन मेने तनहाई से कहा....कि हे तनहाई....
धीरे धीरे सभी दोस्त साथ हमारा छोड़ गये, हम तो अकेले ही थे, फिर अकेले ही रह गये, खता क्या थी हमारी की वो खफा हो गये, ना उन्हो ने कहा कुच्छ और हमें अकेला छोड़ गये.....
तब तनहाई ने कहा की....
मुजे महशुष करोगे तो कभी ना पाओगे अकेले में वो तनहाई हूँ की रहूँगी सदा संगे तेरे देती हूँ आखो मैं आसूँ ओर मन मे किसी की आस, फिर क्यो होता है तू उदास,यह भी तो है संग तेरे......
अब ना समझना खुद को अकेला, हम रहेंगे हमेशा संग तेरे, हम जाएंगे छोड़ के तभी तेरा साथ, जब कोई दोस्त थामेगा तेरा हाथ.........
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