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Kya Likhu.n....
यह शायरी मैने अपने खास दोस्त के लिए लिखी है ! बहोत प्यार है हम दोनो के बीच....मेरी आप लोगो से इल्तिजा है की आप इसे संजीदा ना ले.
आज ग़ज़ल लिखूँ या कलाम लिखूँ, सोचा एक खत दोस्ती का आपके नाम लिखूँ........
लिखना तो बहोत चाहता था हमराज़ तेरे बारे मे, पर नहीं चाहता हूँ ,की सरेआम लिखूँ..........
हम इतने अच्छे कभी ना थे दोस्त तेरे लिए, इसलिए सोचा ये दोस्ती का खत गुमनाम लिखूँ........
अब तो जमती है अक्सर हमारी महफिल, क्या लिखूँ कल की दुश्मनी का कोहराम लिखूँ....
शिकायत तो बहोत थी तुम्हे लेकर ए दोस्त, लेकिन सोचा अंत मे दुआ सलाम लिखूँ.....
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