कतरा कतरा आंशु बहेते रहे,
और हम उन्हे सूखा ना पाए, इस से बड़ी वफ़ा की मिशाल क्या होगी, वो रोए हमसे लिपटकर किसी और के लिए, और हम मना भी ना कर पाए.......